जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ़
विधा---कविता मुक्त छंद
शीर्षक -- सावन ही सावन
व्याख्या -कवि के द्वारा सावन महीने का वर्णन किया गया है ।
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सावन ही सावन
मुझे सावन का महीना ,बड़ा प्यारा लगे
इसके जैसा न कोई, मुझे हमारा लगे ।
सोचता हूं सभी महीना बना दूं सावन
हो जायेगा दुनियां में सावन ही सावन ।
छाये हुए बादल फिर बरसते पानी
चमकते हुए बिजली गगन में सजे ।
जहां देखो फिर जल ही जल
,जल से आज अपना और है कल।
छाये चहुं ओर हरियाली,
गीत गाये खुशियाली ।
जल से भरी हुई नदियां ,
मिलने सागर को चले ।
झूले पड़े बागों में,
खूब मुस्काते हुए ।
बस लोगों के जैसे ही,
खुशियां मनाते हुए ।
मंद मंद चलती पुरवाई,
देख ये खूद उछल पड़े ।
शिव भक्तों का मेला ।
लगा चहूं ओर है ।
ऊं नम: शिवाय का ।
सुनाता शोर है ।
कांवड़ियां जल भर भर के।
सभी शिव धाम चले ।
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