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*रचनाकार-एच-एस-अरमो,अरमान ।
*निवास-रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
जिला--रायपुर ।
शीर्षक-**कोरोना बनाम बेकारी **
विधा-छ्न्द-मुक्त,कविता ।
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~~~•कोरोना बनाम बेकारी •~~
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वैश्विक महामारी कोरोना,
परेशाँ,हुआ जहान सारा ,
फिर भी,भरते हुंकारा,
इससे डरो ना ।01।
सावधानी बरतोगे ---
मास्क लगओगे,दूरी बनओगे ,
सेनिटाईज तुम,हरदम रहोगे,
बच्चों-बूढ़ो को,घर पर रखोगे,
तभी, परिवार-समाज को,
तुम,पूरा सुरक्षित रख पाओगे।02।
अभी तक,लाईलाज दवा बनी नहीं,
प्रयोगधर्मी ईलाज का दम ही सही ,
वेक्सीन बनाने की,होड़ हो रही,
अब वायरस,अपना लक्षण बदल रहा,
मौत का तान्डव,थम नहीं रहा,
सब्र रखें, कहते इसके जानकार,
रामबाण औषधि,बनेगी तो सही ।03।
देश में,हुआ परेशाँ ज्यादतर,
मेरे समाज का अंग,वो मजदूर,
देश में ही,हुआ प्रवासी नामवर ,
बन गया है,वो बेकार मजदूर।04।
महामारी संक्रमण के डर से,
हुआ बंद, सभी प्रकार के काम रे ,
पैसों-पैसों को,हुए बहुत लाचार,
भूखे रहकर,हुए जीने को बेजार ,
वापस लौटा,अपने घर-द्वार ।05।
शासन की,मिली राहत सारी,
पर,दूर हो न पाई,हमारी लाचारी,
आर्थिक परेशानी,दे रही,तनाव भारी,
काम न मिले तो,हुई अब बेकारी ,
लौटने हुये मजबूर,है काम की दुश्वारी।06।
आज मजदूर ही नहीं---
मध्यम वर्ग,पेशेवर लोग व देहाड़ी,
सबकी बढ़ी ,कोरोना से परेशानी ,
कोरोना वारियर भी,बने इसके रोगी,
अब डर लगता,यहाँ सबको भारी।07।
हे!ईश्वर--बचाना हम-सबको,
है यह महामारी,बहुत ही भारी
छायी कितनी,लाचारी और बेकारी,
दूर कर दो ,अब ये परेशानी,
इसकी दहशत से,निपट न जाए दुनियाँ सारी ।08।
÷÷÷÷÷÷÷÷==इति==÷÷÷÷÷÷÷÷
व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बेबस-लाचार है दुनियाँ सारी ,इसलिए सभी काम-धंधे दहशत के कारण बंद से पड़े हैं और चारों ओर आर्थिक परेशानी का माहौल ने बेकारी को जन्म दे दिया है ।
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**एच-एस-अरमो,अरमान,रायपुर ।
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