संबलपुर, जिला-कांकेर (छ .ग.)
शीर्षक-शहरों में पसरा सन्नाटा है
*शहरों में पसरा सन्नाटा है,*
पूरा नगर बन्द बाहर खतरा है।
कोरोना संक्रमण से
बचना नहीं आसान है,
सेने टाइज़र मास्क
आज बचाएगी जान है ।
नियमों को नहीं मानोगे
तो सजा का प्रावधान है,
देश में लॉक डाउन के बाद अनलॉक का
हो रहा बखान है ।
कष्ट भले हो मगर
घर मे रहो कहते सयान हैं।
कोरोना के प्रभाव से सब
दुखी संग मजदूर किसान हैं।
पांडवों के अज्ञातवास
का करो अब ध्यान ,
तेरह वर्ष नहीं यह तो
कुछ दिनों का इम्तिहान है ।
रोग से बचने देश में
बना पहले से विधान है,
सादा जीवन उच्च विचार
को बनाएं निशान है ।
कोरोना को हरा कर
लाना नया बिहान है,
सावधानी जरूरी है सब कहते
जान हैं तो जहान है ।
शहर में पसरा सन्नाटा है,
पूरा नगर बन्द,बाहर खतरा है।
व्याख्या-प्रस्तुत कविता में कोरोना के दौरान लॉक डाउन हुआ ,और जो स्थिति निर्मित हुई उसका वर्णन किया गया है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर ,कांकेर(छ. ग.)
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