Friday, July 10, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- सन्नाटा है

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर (छ .ग.)
शीर्षक-शहरों में पसरा सन्नाटा है
*शहरों में पसरा सन्नाटा है,*


पूरा नगर बन्द बाहर खतरा है।
कोरोना संक्रमण से 
बचना नहीं आसान है,
सेने टाइज़र मास्क 
आज बचाएगी जान है ।

नियमों को नहीं मानोगे 
तो सजा का प्रावधान है,
देश में लॉक डाउन के बाद अनलॉक का 
हो रहा बखान है ।

कष्ट भले हो मगर 
घर मे रहो कहते सयान हैं।
कोरोना के प्रभाव से सब 
दुखी संग मजदूर किसान हैं।

पांडवों के अज्ञातवास 
का करो अब ध्यान ,
तेरह वर्ष नहीं यह तो 
 कुछ दिनों का इम्तिहान है ।

रोग से बचने देश में 
बना पहले से विधान है,
सादा जीवन उच्च विचार 
को बनाएं निशान है ।

कोरोना को हरा कर
लाना  नया बिहान है,
सावधानी जरूरी है सब कहते 
जान हैं तो जहान है ।
शहर में पसरा सन्नाटा है,
पूरा नगर बन्द,बाहर खतरा है।
व्याख्या-प्रस्तुत कविता में कोरोना के दौरान लॉक डाउन हुआ ,और जो स्थिति निर्मित हुई उसका वर्णन किया गया है।

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर ,कांकेर(छ. ग.)

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