जिला-बलौदाबाजार
विषय-श्रवन मास पर केन्द्रित रचना
विधा-छंद मुक्त
शिर्षक-आया सावन का महिना
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आसमान के आँचल पर मेघाएं आयी।
ससुराल से बहन को भाई की याद आयी।।
भाई की राह देखती माना लेने देहलीज पे आ गया।
लो,अब मायके की मधुर यादों का महिना सावन आया।।
यादों की सुनहरी लड़ियो में झिलमिलाते पल होंगे।
बिछुड़े हुए सखियों से मिलने का अवसर होंगे।।
मायके में मिलेगी बहन को भाई का प्यार भरा साया।
लो,अब मायके की मधुर यादों का महिना सावन आया।।
गाँव की अमराई मे सावन के झुला झुलेगी।
सखियों के साथ मिलकर सावन गीत गायेगी।।
सावन के महिना में पानी से भिगने का एक आनंद समाया।
लो,अब मायके की मधुर यादों का महिना सावन आया।।
सखियों के साथ खेलेगी लुका छिपी आँख मिचौली।
अपनी भाभी से करेंगी नंदोई हँसी ठिठोली।।
बहन देगी अपने भाई को प्रेम दुलार की छाया।
लो,अब अब मायके की मधुर यादों का महिना सावन आया।।
व्याख्या-ससुराल गई बहन को जैसे ही सावन का महिना आया। तब बहन को अपना गांव अपनी सखी सहेलियों को याद आती है।
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