ग्राम बुलाकी
जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़
विधा हाइकु
शीर्षक महिमा वंदना
*************************
"महिमा वंदना "
जन्म दात्री माँ
नमन करूँ तेरा,
कृतज्ञ हूँ मैं।
कैसे भूलू मैं,
उपकार मैं तेरा,
वंदन मेरा।
संस्कार पाया,
तुझसे मैं जननी,
नमन तेरा।
चुकाऊँ कैसे,
ऋण मैं तुम्हारा माँ,
अकिंचन हूँ।
आशीष देना,
मैं तुम्हारा सुपुत्र,
प्रणाम तेरा।
तेरी रक्षा मैं,
जीवन भर करूँ,
आशीर्वाद दो।
उपकारी मैं,
कहलाऊँ जग में,
वीरत्व बन।
शिकन ना हो,
चेहरे पर तेरा,
सदा हो सुखी।
तेरी ममता,
स्वरुप छाया तले,
मैं सुकून।
ममता मयी,
माँ मेरी, तेरा करूँ,
नित वंदन।
_________________________
व्याख्या - इस कविता में कवित्री माँ की महिमा का वंदना करते हुए उनके उपकारों का वर्णन किया है । साथ-साथ माँ की उपकारों का ऋण कैसे चुकायें को व्यक्त की है एवं माँ की ममता की छाया तले वह सुकून की जिंदगी जी रही है और उपकारी बनके वीरत्व(वीर आचरण)भाव से माँ की रक्षा एवं उसकी सुख की कामना की है।वह प्रतिदिन ममतामयी माँ की वंदना कर,प्रणाम करते हुए आशीष मांग रही हैं।
No comments:
Post a Comment