Wednesday, July 29, 2020

डिंडोरी मध्यप्रदेश से कवयित्री गरिमा कांसकार जी की कविता- बेटियाँ विदाई में रोती नहीं

गरिमा कांसकार
डिंडोरी मध्यप्रदेश
शीर्षक- बेटियाँ विदाई में रोती नहीं

जैसे ही शादी के लिये
देखने आते है
जाते समय 
मोबाईल लड़की के
 हाथ थमा जाते है
फिर बातें शुरू हो जाते है
बातें इतनी होती है
की तमाम डर दहशत
सब कुछ बातों में 
बह जाता है
डर का नामोनिशान नही
रह जाता है
वो अजनबियों वाली
बात नही रह जाती है
लगता है सब कुछ
जाना पहचाना तो है
पहले मायके को
छोड़ने का दर्द
अंजान लोगों के 
बीच रहने की 
घबराहट बिदाई के
समय बुरा हाल कर
देती थी
जिससे बेटियाँ और
उनके परिवार वाले
फूट फूट कर रोते थे
अब ससुराल 
जाने की खुशी 
इतनी  होती है
की आँसुओ का नमोनीशन 
नही होता है
बस होठो में मुस्कान 
होती है

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