Wednesday, July 29, 2020

राजनांदगांव,छत्तीसगढ़ से कवि प्रवीण कुमार ठाकुर जी की कविता- पत्थर

प्रवीण कुमार ठाकुर
राजनांदगांव, छत्तीसगढ़
*विषय - पत्थर*
*विधा  -  दोहा छंद*
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शिल्पकार  मूरत  गढ़े, पत्थर  दे आकार ।
कृपा करे शिवनाथ तो,सपने  हो साकार ।।

घात  हिया  में जो  सहे, धरते पाहन रूप ।
विशद भाव जन पूजते,करे दीप अरु धूप।।

पत्थर  माने   देवता  , पूज  रहे    संसार ।
भोले  पालनहार  है, करते  अरि  संहार ।।

शील भाव  जिसमे नही ,नर है शैल समान।
नम्र भाव उर जो धरे , करते जन सम्मान ।।

आदि काल से हो रहा,पाहन का उपभोग ।
जैसे   चाहा   भोगते ,  बनते   जैसे  योग ।।

*प्रवीण कुमार ठाकुर* ✍🏻
*पतोरा,छुरिया, राजनांदगांव, छत्तीसगढ़

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