Tuesday, July 7, 2020

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- आगे किसान बरसात

रचनाकार -उर्मिला सिदार
 ग्राम बुलाँकी ,जिला रायगढ़ छत्तीसगढ़
 विधा -गीत
 शीर्षक- "आगे किसान बरसात"
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 🌷आगे किसान बरसात🌷
  करिया करिया बादल कुदरत हे।
सूर-सूर-सूर-सूर बैहर धुकत हे।
चारो मुडा होगे अँधियार।
नागर जुडा के चेत करो  जी।
आगे कि सान बरसात।

अरतता बियासी के नागर।
धैन हे किसान तोरेच जाँगर।
खाँद म बोहे बियासी के नागर।
हाथ म धरे  लौठी तुतारी।
पिछु म कमिहा बोपरामन ।
धरे  हें  गैती कुदारी।
 करिया -करिया बादर......

 नागर फंदाये बुडगा बैला।
रेगत हे खलभल चिखला।
डेरी हांथ म तुतारी धरे हे।
धरे हे नागर के मुठीया।
मुड म पागा बड्डी पहने।
चुहचुहावत हे मुड ले पसीना।
 करिया -करिया बादर........

कोन डहर मैना बोले।
कोन डहर बोले पडकी।
चिरई चिरगुन के बोली म।
खेत खार हर लागे गझीन।
मन के साल्हो ददरिया गावत हे।
डोकरी छोकरी सबो परानी।
 करिया- करिया बादर.......

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