जिला -बिलासपुर (छ. ग. )
विधा -छंद मुक्त
शीर्षक -किसान
मैं अक्सर सोंचता हूँ स्तब्ध
हर एक व्यक्ति को चाहिए,
तीन समय का भोजन नित,
बारहों महीने हर हल में l
किसान खेती करते हैं,
शहरों में लोग रहते हैं,
कोई भी खेत नही जाते,
जाना नही चाहते, हाँ l
क्योंकि सभी पढ़ लिख गये,
लेकिन भोजन किसान की देन,
देने वाला ईश्वर तो वो कौन?
सच है किसान ईश्वर प्रतिरूप l
किसान न होते तो क्या होता?
मानव जीवन कहाँ होता ?
देश, दुनिया के नक़्शे का क्या?
अब बताओ सबसे जरुरी क्या?
खेती, खेती, खेती कहो सब,
किसान, किसान, किसान बनो,
नौकरी ठीक,किसानी बेहतर,
एक बाहरी सौंदर्य, दूजा नींव l
Nice lines
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