द्रोपती साहू "सरसिज"
जिला-महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक;"तीजा पोरा तिहार"
विधा-कविता(छत्तीसगढ़ी)
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तीजा पोरा बहिनी बर सुख के तिहार होथे,
मइके सुरता लमाथे…......
हाँ हाँ वो बहिनी सुरता हा इंदरी रोवाते।
महतारी बाप हा हमरो,आए के रद्दा देखय,
बहिनी सखी मन सकलाथे.....
हाँ हाँ वो दीदी,मइके के सुरता लमाथे।।
नानपन म भाई बहिनी के,गजबे दुलार राहय,
राखिहौ जतन के मया ला,
हाँ हाँ रे भाई नानपन के दीदी के मया ला।
घरे मोर जाए बेरा दाई हा खोज जोरा करय,
रंग रंग के जीनिस ल जोरय….......
हाँ हाँ वो बेटी,अइसन मया कहाँ ला पाबे।।
लागमानी बड़का हे, मन म संतोस राखव,
करिहौ भतीज बर दया ला….......
हाँ हाँ वो फुफु,झन करिहौ लुगरा के हिन्ता।
धन अउ दोगानी संगी,ओइरछा के छाँय होथे,
लहू के नता ला बँचाहू.......
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द्रोपती साहू "सरसिज"महा.(छ.ग.)
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