कवियित्री- श्रीमती गायत्री ठाकुर "सक्षम"
जिला -नरसिंहपुर
शीर्षक-नयनाभिराम
विधा -कविता
*नयनाभिराम*
प्राकृतिक सौंदर्य होता है नयनाभिराम।
उस से मिलता है हमको सुकून और आराम।
सागर नदियां और झरने सभी होते हैं सुखधाम।
दिल को प्रफुल्लित करने वाले होते हैं नयनाभिराम।
वन उपवन और वाटिका की तो बात निराली।
नयनाभिराम होकर सब देते हैं ताली।
तारों से भरा नीला अंबर विशाल,
नयनाभिराम होता पूर्णमासी का चांद।
नन्हे बच्चों की सूरत नयनाभिराम होती।
देख देख उनको आंखों में थकन न होती।
ईश्वर की मूरत तो दुनिया में कहीं भी देखो,
हरदम हर जगह हर एक को नयनाभिराम होती।
श्रीमती गायत्री ठाकुर "सक्षम"
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