Friday, July 31, 2020

महासमुन्द, छत्तीसगढ़ से कवि कमलाकांत प्रधान जी की कविता- ये मजदूर है

नाम - कमलाकान्त प्रधान
जिला -महसमुन्द् 
तह्सील-सरार्ईपाली
ग्राम-बाराडोली,

            ये मजदूर है

पैरों में छाले है, मुंह में निवाले नहीं है, क्योंकि ये मजदूर है मज्बुर है, फिर भी एक गरुर् है बस ,थोडा सा घर दूर है !

कालचक्र का पहिया महामरी की नींव पे घुम रहा है,
आज आंसुओ क सैलाव आ रहा है
इस महमारी का कहर सरेआम आ रहा है।
तस्विरे ये ही नही कि वे मन से विकलांग है,
वह भी आज चल रहा है
गाँव तक पहुचने का रास्ता बडा कठिन हो रहा है 
पैरों में छाले है मुंह में निवाले नही है क्योंकि ये मजबूर है म‌‌‌‌‌जदूर !
  कमलाकांत प्रधान

1 comment:

  1. आशा करते है आप कहीं भी रहे खुश रहे मुस्कुराते रहे !आज यह दौर आ गया कि मजदूर गावं से शहर जा रहा था आप गावं आ रहा है देखो ये विपदा इस कदर छा रहा मजदूर आज शहर से गावं आ रहा देखो ये विपदा इस कदर छा रहा । मेरे प्रिय पाठक आप लॉगो से कई ने कहा है कि आप ने "का " जगह "क" का प्रयोग किया है आप लोगों की प्रतिक्रिया लाज्मी है यह दर्शाता है बीते समय को "का" दर्शाता है और "खा" भविस्य को बताता है लेकिन आप तो समझदार है अगर हा तो आप अपनी प्रतिक्रिया हमें comment में बताए।

    ReplyDelete

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...