शीर्षक - ग़ज़ल
राज्य - रुद्रप्रयाग उत्तराखंड
ना जलाया जाय - ग़ज़ल
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न पीने वाले को और पिलाया जाय
उसके हार के गम को भुलाया जाय।
वो कहते हैं बदल गए हो आजकल
गरबान उनका उनको दिखाया जाय।
मुझमें कमियां ही दिखती हैं जिनको
पहले उनको रास्ते से हटाया जाय।
यूं ना धिक्कारो मुझे, कुछ तो हूं मै
अतीत का हिसाब जरा बताया जाय।
चलने की ताकत बाकी है बुढ़ापे में
मेरी लाठी को अभी न जलाया जाय।
'सिंधवाल' के शब्द जिंदा रहेंगे सदा
भले ही लिखे पन्नों को मिटाया जाय।
-संदीप सिंधवाल
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