डोंगरगाँव , जिला - राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)
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मेघ के प्रति
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ओ मेघ !
क्यों दिलाता है
कोरी दिलासा ?
क्यों बँधाता है
मन में झूठी आशा ?
मैं जानता हूँ
तुम आते हो
छा जाते हो
और
बिन बरसे ही
चले जाते हो
फिर क्यों
मैं झूठी आस लगाऊँ ?
क्यों अपने को कोसूँ
और रोऊँ ?
मैं जानता हूँ
तुम भी
इंसानों की तरह
तेवर
बदलते जाते हो
पहले
ललचाते हो
और फिर
तरसा कर
चले जाते हो
अच्छा होता
तुम
मेघ ही रहते
आकर
धरा की
प्यास हरते
फिर
कोई तुम्हें
इंसानों की तरह
झूठा और बेईमान
तो न कहता ?
सच्चे मन से
तेरी
आराधना करता ...........
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गजेन्द्र हरिहारनो " दीप "
डोंगरगाँव , जिला- राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़ )
very nice sir ji
ReplyDeleteवाह....बहुत सुंदर रचना
ReplyDeleteAdbhut
ReplyDeleteमेरी रचना को सम्मान देने हेतु आप सभी को हार्दिक आभार
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