Monday, July 13, 2020

छत्तीसगढ़ से गजेन्द्र हरिहारनो " दीप " की रचना- मेघ के प्रति

गजेन्द्र हरिहारनो  " दीप "
डोंगरगाँव , जिला - राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)
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मेघ के प्रति
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ओ मेघ !
क्यों दिलाता है 
कोरी दिलासा ?
क्यों बँधाता है 
मन में झूठी आशा ?
मैं जानता हूँ 
तुम आते हो 
छा जाते हो 
और 
बिन बरसे ही 
चले जाते हो 
फिर क्यों 
मैं झूठी आस लगाऊँ ?
क्यों अपने को कोसूँ
और रोऊँ ?
मैं जानता हूँ 
तुम भी 
इंसानों की तरह
तेवर
बदलते जाते हो 
पहले 
ललचाते हो
और फिर
तरसा कर
चले जाते हो 
अच्छा होता 
तुम
मेघ ही रहते
आकर
धरा की 
प्यास हरते
फिर
कोई तुम्हें
इंसानों की तरह
झूठा और बेईमान
तो न कहता ?
सच्चे मन से
तेरी
आराधना करता ...........
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गजेन्द्र हरिहारनो " दीप "
डोंगरगाँव , जिला- राजनांदगाँव (छत्तीसगढ़ )

4 comments:

  1. वाह....बहुत सुंदर रचना

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  2. मेरी रचना को सम्मान देने हेतु आप सभी को हार्दिक आभार

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