संबलपुर, जिला-कांकेर
शीर्षक-सच्चाई की ताकत
संस्मरण-
सच्चाई की ताकत
जीवन में कुछ बातें हमेशा याद रहती है।अगर 'सच' से संबंधित घटना होती है तब तो वह अविस्मरणीय ही रहता है।
लगभग सत्ताईस वर्ष पहले की बात है। बात उन दिनों की है जब कक्षा 12 वीं की बोर्ड परीक्षाएं हो रही थी।हमारी ड्यूटी पर्यवेक्षक के रूप में लगी थी।मेरी नियुक्ति हायर सेकेंडरी के बगल के स्कूल में थी।परीक्षा में कोई नकल करे या नकल कराना,मुझे बिल्कुल पसंद नहीं था।बच्चे और विषय शिक्षक भी चाहते नहीं थे कि मेरी ड्यूटी पर्यवेक्षक के रूप में लगे।बच्चे तो देवी,देवता तक मनाते थे।परीक्षा में एक संस्था के शिक्षक और एक दूसरे स्कूल के शिक्षक की ड्यूटी लगती थी।
12वीं गणित की परीक्षा चल रही थी।उसी समय गणित के शिक्षक अपने ट्यूशन वाले बच्चों को बताने की गरज से आए और श्यामपट पर सवाल हल करने लगे।हमें नागवार गुजरा हमने कहा 'ये क्या कर रहें है सर,"मगर वो बेशर्मी से हँसते रहे।इसी बीच एक छात्र उठकर कहने लगा-ये क्या कर रहें है सर।ये गलत है।मैं रात-रात भर मेहनत करता हूँ।ऐसे सब बता देंगे तो कैसे बनेगा।शिक्षक चिढ़ गए और प्राचार्य से उल्टी -सीधी शिकायत कर दिए।छात्र सत्य पर अडिग था।इसी कारण उसे प्रायोगिक परीक्षा में मात्र अठारह नम्बर मिले।दो अंक से प्रथम श्रेणी में आने से रह गया,और ट्यूशन वाले बच्चों को पैंतीस अंक से ऊपर दिए उनमें से एक -दो परीक्षा में उत्तीर्ण भी नहीं हुए।
उस ईमानदार लड़के ने पढ़ाई जारी रखी और बी .एस .सी. की परीक्षा पचहत्तर प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की।आज वो प्रशासनिक पद पर है ।ये है 'सच्चाई की ताकत'हैं।वो सत्य के पथ पर चलता रहा,मेहनत तो करता ही था तो सुनहरा भविष्य भी उसके सामने खड़ा था।ये होती है सच्चाई की ताकत जिसकी जीत सुनिश्चित होती है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर (छ. ग. )
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