जिला-बलौदाबाजार-भाटापारा
शिर्षक - मोर नदी तीर गांव
विधा-छंद मुक्त रचना
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अमरईया के छांव म मोर नदी तीर गांव।
सुघ्घर बसे हाबय मोर नदी तीर गांव ।।
गांव के चारो कोति रुख-राई ले लह लहारावत,
जिंहा चिरई चिरगुन के बोली ले चह चहावत।
अमरईया के छांव म............
लईका मन खेलय अमरईया म घर-गुंदिया,
जिंहा बनावय अपन मया-परेम के भिथिया।
मोर गांव के मनखे मन गावय सुआ करमा पंथी ददरिया,
जांगर टोर करथे जम्मो कोनो खेती किसानी भईया।
अमरईया के छांव म.............
नदिया के खेड़ तीर-तीर म चरावय बरदिहा बरदी ल,
नदिया के बोहात पानी म चलावय ढोगहार ढोगा ल।
मोर गांव लागे जइसन कन्हैया के गांव बिंदाबन,
चारो कोति ह दिखय मन ल हरईया जस मधुबन ।
अमरईया के छांव म................
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