Saturday, July 25, 2020

रायपुर से रजनी शर्मा बस्तरिया की रचना- गन्ने की सोई

रचनाकार      श्रीमती रजनी शर्मा बस्तरिया
जिला          रायपुर
शीर्षक         गन्ने की सोई
विधा।         मुक्त छंद

गन्ने की सोई
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 खोपा कसते हुए फूलो,
गन्ना तोड़ कर लाती है ।
गन्ने की सफेदी तन पर 
लिपट जाती है और,
जंगली फूल सी फूलो,
खिलखिलाती है ।
रस गंज में भर कर ,
रांधती है  जब बोबो।
गुड़ जब पकता है,
गांव गुड़ सा हो जाता है।
चार गांव भी गुड़गुड़ाते हैं,
हवायें  चुगली जो करती हैं।
फूलो और मिठास की,
बिलवा गुड़  बन जाता है भेला
तब बगर जाता है उजाला,
फूलो के गांव और घर में ।

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