Friday, July 24, 2020

छत्तीसगढ़ से कवि संतोष श्रीवास्तव "सम" जी की कविता :- आया सावन पर

नाम -संतोष श्रीवास्तव "सम"
राज्य -छत्तीसगढ़ 
शीर्षक -   आया सावन पर 
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आया सावन भी पर देखो, 
झूले अभी तक नहीं डलें, 
किसी रूप में कहीं कोरोना, 
हाय करें क्या, यहां पले। 

साजन से रखे दूरी सजनी,
भोर में भी छाई वह रजनी, 
कैसे कब छोड़ेगा यह भय,  
मिटेगी कब तक ये वीरानी । 

सावन के इन मधुर पलों में,
जो भय छाया है मिट जाये, 
काश पुन: आ जाये वो पल, 
सजनी से साजन मिल पाये। 

मिलन दूर है न दिखे छोर है, 
काली घटा  बड़ी घनघोर है ,
जिधर भी जाती पाती नजरें, 
बस कोरोना का वही शोर है। 

हाय बहुत ही इस सावन में, 
बनती दूरी नित यह है खले ,
नहीं कहीं अब पले कोरोना, 
न हीं किसी का प्यार जले। 

आया सावन भी पर देखो, 
झूले अभी तक नहीं डले, 
किसी रूप में कहीं कोरोना, 
हाय करें क्या यहां पले।। 

--- संतोष श्रीवास्तव "सम"
          कांकेर, छत्तीसगढ़

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