Saturday, July 4, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- अंधविश्वासों को दूर भगाएं

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
            संबलपुर, जिला कांकेर
                    (छ.ग.)

  शीर्षक- *अंधविश्वासों को दूर भगाएं*

हम पढ़े-लिखे 
सभ्य समाज कहलाते,
मगर स्वंय को 
अंधविश्वासों से जकड़े पाते।

तन-मन से जिंदा है
 मगर विचारों से,
स्वंय को रूढ़िवादी
 रिवाजों से भरमा जाते।

बड़ी-बड़ी डिग्रियों 
का परचम फहराते,
छुआछूत,
बिल्ली का रास्ता काटना,
प्रेतबाधा से बन्धें नजर आते।

ज्ञान- दीपक को 
मन अन्तस् में जलाएं,
अंतर्मन का अब 
हम तिमिर हटाएं।

तर्कों के आधार पर देखे 
दलित कोई न कहाएं,
हाड़-मांस के सब बने तो 
दुराव कहाँ से आएं।

आओ भेदभाव से 
रहित सभ्य समाज बनाएं
अंधविश्वासों को दूर कर 
नवभारत बनाएं।

व्याख्या :- प्रस्तुत कविता में पढ़ लिखकर 
भी हम अंधविश्वासों से जकड़े हुए है।
उसको  दूर कर नए भारत का निर्माण 
करने की बात कर रहे है।

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर (छ.ग.)

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