लैलूंगा, जिला-रायगढ़
विधा-मुक्त छंद (अंधविश्वास पर प्रहार करती रचना)
शीर्षक-नई शुरुआत
आओ मिलकर एक नई शुरुआत करें
काले-गोरे के भेदभाव से खुद को आजाद करें
मैं अद्भुत, अप्रतिम, अद्वितीय हुँ ये मान लें
और वर्षों से थोपी मानसिकता से निकल
अपने मन को आज आजाद करें।
आओ मिलकर एक नई शुरुआत करें
समाज की बेड़ियों से खुद को आजाद करें
मकरंद से मिली मुस्कान की मल्लिका हुँ ये मान लें
और सदियों सी खिंची दायरों से निकल
खुले आसमान में उड़ान भरें।
आओ मिलकर एक नई शुरुआत करें
सिर पर रखी पल्लू से खुद को आजाद करें
सहज,सरल,सबल,सहयोगी हुँ ये मान लें
और कदमों से कदम मिलाकर
खुद की मंजिल चुनें।
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