संबलपुर, जिला -कांकेर
शीर्षक :- हरेली अउर परियावरण
•°• *हरेली अउर परियावरण* •°•
आगे हरेली तिहार
चलव संगी झूमो नाचो आज।
नवा -नवा रुख लगाबो
परियावरण ला स्वछ बनाबो।
धरती दाई के कोरा मां
हरियर रंग सुहाथे,
जीव -जंतु अउ मनखे के
मन ला भाथे।
भुइयां के हम
सेवा करबो,
धन धाम ले
हमर देश लाभरबो।
घर-घर में चीला रोटी
अउ गेड़ी के शोर बगराबो,
टँगिया,रांपा, गैती,के
पूजा करबो।
चारों मुड़ा पेड़ लगाबो,
गाँव-गली ला उज्जर बनाबो।
हरियर पेड़ लगा के
परदूसन दूर भगाबो।
*व्याख्या*:-उपरोक्त कविता में हरियाली त्योंहार मनाने एवं पर्यावरण को शुद्व
बनाने की बात कही गई है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)
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