Monday, July 20, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- हरेली

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
        संबलपुर, जिला -कांकेर
शीर्षक :- हरेली अउर परियावरण
 •°• *हरेली अउर परियावरण* •°•

आगे हरेली तिहार 
चलव संगी झूमो नाचो आज।
नवा -नवा रुख लगाबो 
परियावरण ला स्वछ बनाबो।

धरती दाई के कोरा मां 
हरियर रंग सुहाथे,
जीव -जंतु अउ मनखे के 
मन ला भाथे।

भुइयां के हम 
सेवा करबो,
धन धाम ले 
हमर देश लाभरबो।

घर-घर में चीला रोटी 
अउ गेड़ी के शोर बगराबो,
टँगिया,रांपा, गैती,के 
पूजा करबो।

चारों मुड़ा पेड़ लगाबो,
गाँव-गली ला उज्जर बनाबो।
हरियर पेड़ लगा के 
परदूसन दूर भगाबो।

*व्याख्या*:-उपरोक्त कविता में हरियाली त्योंहार मनाने एवं पर्यावरण को शुद्व 
बनाने की बात कही गई है।

       नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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