स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
शीर्षक -"हरियाली"
विधा- छंदमुक्त कविता
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सारा आलम नया- नया
लगे जहां हरा- हरा
नदी झरना भरा- भरा
हरीतिमा लिए धरा
आलिंगन किए सजना
सजनी का रूप खिला
प्रकृति भी प्यारी हुई
अम्बर को गले लगा
सावन का झूला पड़ा
पीपल का पेड़ हिला
वृहंग वृन्द मेघ को चला
देख मन भी पखेरु हुआ
पपीहे की प्यास बुझा
इतराती रानी बरखा
मोर मग्न मतवाला हुआ
देख मेघ नृत्य कर डाला
शिवा का दरबार सजा
भोले का डमरू बजा
भांग का स्वाद चढ़ा
भक्तों को आशीष मिला
हरियाली का नजारा
नया उदगार है लाता
देख लहलहाता खेतों को
मेरा छत्तीसगढ़ मुस्काता
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