जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता
शीर्षक --- छत्तीसगढ़ के पकवान
व्याख्या ---कवि के द्वारा छत्तीसगढ़ में जो पकवान घर घर उत्सव विभिन्न त्योहारों में बनाये जाते हैं एवं खाये जाते हैं कोई पकवान रोज ही बनाये एवं खाये जाते हैं कुछ विशेष अवसर पर या विशेष मेहमान के आगमन पर ।उनका वर्णन किया गया है ।
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छत्तीसगढ़ के पकवान
छत्तीसगढ़ म घर- घर चीला,
होत बिहनिया देख ।
अंगारक घलो घर-घर बनथे,
चंदा सुरुज कस गोल एक ।
नुनछुर -नुनछुर ठेठरी खाले,
अउ करी सोंहारी ।
बरा खाले पतरी दोंना भर ,
पेट नई पावस भारी ।
गुरतुर होथे मालपुआ,
तसमई घलो गुरतुर ।
अइरसा,खुरमी,पपची संगी,
खात तन -मन लागे मधुर ।
देहदौरी खाले मजा उड़ाले,
फरा, चौसेला, गुर बरोबर।
तिखुर खाले गुन ल गाले,
कहबे राखबे गुलगुला मोरो बर ।
सबला पताल चटनी म खाले,
चाहे साग तरकारी ।
मन लागीस निमगा खाले ,
गुन गा छत्तीसगढ़ महतारी ।
अतके रोटी पीठा हमर ,
झन अपन ले दूर रहव ।
अपन गंगा पार उतरव ,
अपने गंगा म तरव ।
गिरधारी लाल चौहान
बहुत सुंदर
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