Wednesday, July 29, 2020

कांकेर छत्तीसगढ़ से देवव्रत कर शर्मा जी की कविता- अस्तित्व

नाम       - देवव्रत कर शर्मा 
पता       - आवास पारा जैसा कर्रा पोस्ट जैसा कर्रा चारामा जिला कांकेर छत्तीसगढ़ 
शीर्षक    -  अस्तित्व

बरसात में जब घर से निकलते
दौड़ कर पानी से बचते बचाते ।
एक से दुसरे पेड़ों की ओट से
हम लोग विद्यालय पहुंच जाते।।

ठंडी समय जब घर से निकलते 
एक दुसरे पेड़ो के बीच छनके।
आती धूप का सुखद स्पर्श लेते 
हम लोग विद्यालय पहुंच जाते।।

गर्मी के दिनों जब घर से निकलते 
तपती सड़क पर नंगे पांव दौड़ते
एक दूसरे पेड़ों के ठंडी छाँव तले
हम लोग विद्यालय पहुंच जाते ।।

सड़कें हुई चौड़ी दो भागों में बटी 
सड़क किनारे की अमराई कटी
दोनों ओर बड़े भवनों का बसेरा 
समृद्धि मिली और पुरवाई घटी।।

दूरी कम हुई बीच दो बस्तियों के
फासले बढ़े नामचीन हस्तियों के
यूं खुश हो रहे कि किनारा मिला
मिटा कर के पहचान सदियों के ।।

कितना सुखद एहसास खो गया 
उस राह का अस्तित्व बिखर गया 
हाथों मे हाथ डाल सुबह से शाम
सड़क पर विचरना किधर गया ।।

जब भी मैं उस राह से गुजरता हूँ
समय के साथ बदलाव देखता हूँ ।
स्मृतियों में संजोये उन दिनों को
अस्तित्व के लिए द्वन्द्व देखता हूँ।।

चलो एक बार फिर से नये रूप में 
इस शहर का एक पहचान बनायें
जो राह कभी अमराई से सजी थी
उसे रौशनी से जगमग जगमगायें।

सड़क के दोनों ओर गगन छुते
आम वृक्षों का पहचान खो गया 
चौराहे जगमगाने लगे रौशनी से 
ये चारामा गांव से शहर हो गया ।।
ये चारामा गांव से शहर हो गया ।।

       देवव्रत कर शर्मा 
 आवास पारा जैसा कर्रा चारामा 
    जिला कांकेर छत्तीसगढ़ ।

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