Thursday, July 9, 2020

कांकेर से मीरा आर्ची चौहान की रचना- दर्शन

कवयित्री-मीरा आर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-जीवन -दर्शन
विधा-कविता ( मुक्त छंद)

जीवन, जन्म और
मृत्यु के बीच की
कड़ी है।
इन्हीं उलझनों में
उलझी ये कैसी
लड़ी है।

बड़ी चालाक है
ये जिंदगी
नई सुबह दे
हमारा आज
छीनती जाती है।

चैन,सुख और
समृद्धि की
चाह में उम्र
बीत जाती है।

जीवन है तो
आस है ,
ग्रीष्म में 
बरसात का
पतझड़ में
बसंत का
कि फिर आयेगा
सावन बिछड़े हुए
आत्मीय जनों से
पुनर्मिलन होगा।

किंतु संवेदनाओं का
झरोखा हर पल
खोजता है
मासूम बचपन 
और खूबसूरत
यौवन।

तभी सिसक पड़ता है
बूढ़ा तन जिसके
मस्तिष्क में कैद हैं
अतीत की तमाम
खुशियां, झोली भर
सपने व धुंधली यादें।

और तभी मौत
आती है
चुपके-चुपके
पलभर में
मना ले जाती है
रुह को 
हमेशा -हमेशा
के लिए।

यही है जन्म और
मृत्यु के बीच की
यात्रा और
जीवन -दर्शन।

मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग

_________________________

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...