पता - पेंडरवानी , बालोद , छ.ग.
शीर्षक - कुर्बानी न जाया जाएगा
वीर शहीदों की कुर्बानी ,
कभी न जाया जाएगा ,
कृतज्ञ राष्ट्र उनकी बलिदानी ,
रो -रो-रोकर गायेगा ,
बाज सी आँखे है हिन्द सेना ,
सरहद पर देखो डटे हुए हैं ,
देश के भीतर हम सभी क्यों ?
जाति - मजहब में बटें हुए हैं ,
एक शहीद हुए अगर अब तो ,
दस -दस को घुस के मारेंगें ,
दीवार ढहाकर तुझको ,
बीजिंग तक पछाड़ेंगे ,
गलवान घाटी , सियाचीन या-
तिब्बत के रास्ते वार करेंगे ,
नजर उठी गर सरहद पार ,
अब तो हम हर हद पार करेंगे ,
कई माँ के लाल बिछड़ गए ,
कई बहन की राखी फीकी है ,
कई बच्चे अनाथ हुए हैं ,
उनकी बिगड़ी तक़दीर जो लिखी है ,
भूले नही हम एक भी बात ,
की थी जो तुम वारदात ,
चुन - चुन कर बदला लेंगे ,
हमको तुम उकसाओ मत ,
हम प्यार अमन के दीवाने हैं ,
हमको तुम भड़काओ मत ,
अब न सहेंगे एक वार भी ,
जवाब तगड़ा होगा हर बार अब ,
पड़ोसी हो भाई चारा रखो ,
नही तो होगा तोप ,बंदूके तलवार अब ,
- - शैलेन्द्र चेलक - -
बहुत सुन्दर गुरू जी.
ReplyDeleteबहुत सुन्दर गुरू जी.
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