विधा-तुकांत कविता (निर्वेद भाव)
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निश्चय हमारा हो अटल,वहीं ऊँचा हो मनोबल ।
नि:शेष हो भय मन में, और साहस हों प्रबल ।।
देकर उड़ान सोच को, संकल्प करें हम नेक ।चट्टानों सी चुनौतियों को, जड़ से उखाड़ फेंक।।
रेख भाग्य की खींचकर, मात दो अभाव को ।
साहस हों अदम्य, छूने दो शिखर प्रभाव को ।।
निखारकर निज नाम, कर्मठता का प्रमाण दो ।
रखो स्वाभिमान जिंदा, देश के हेतु प्राण दो ।।
अभाव में अद्भुत बनें, यह सोच हों स्वभाव में ।
नाम उसी का होता जो, प्रभावी हों अभाव में ।।
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द्रोपती साहू "सरसिज"
श्रीराम कालोनी महासमुन्द (छ.ग.)
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