संबलपुर, जिला-कांकेर
विषय-प्रेमचंद
शीर्षक-प्रेमचंद
आओ मनाएं जयंती याद करें उस मसीहा को,और
जग में बाँटे झूठी मुस्कानों का दर्द।
जर्जर टूटी झोपड़ियों के संग सामन्त शाही का झेलता दंश,
भूमिहीनों के कंधों पर झेलता सामंतों और भूपालों का दर्द।
ऐतिहासिक महलों और मीनारों का सौंदर्य सबने गाया,
नहीं गाया किसी ने खेतिहारों का दर्द।
धनिया होरी की बेबसी जिसमें निकला आँखों में जमा सालों का दर्द।
अब ना कभी ऊँचे ख्वाबों की बातें,ना बूढ़ी काकी की लालसा,
जहाँ छुपा है असंवेदनशीलता का दर्द।
राजमहल और सामन्त पैसे वालों के लिए
कौन सा पंचायत सुलझाएगी हम कंगालों का दर्द।
शोषितों, पीड़ितों को कौन पूछेगा हर बोझों पर लिखा हमालों का दर्द।
अपनी रचनाओं में लिखा,किसान,मजदूर,मिट्टी ,गाँव, खलिहानों धान के बालों का दर्द।
साहूकारों ने बहीखातों में चौगुनी सूद बढ़ा दिया,
इधर बढ़ गया मजदूरों और अनब्याही बेटियों का दर्द।
सच्ची श्रध्दांजलि होगी उस दिन जब मिलेगा भूमिहीन, मजदूरों को न्याय,
उस दिन खत्म होगा किसानों के छालों का दर्द।
न्याय नहीं मिलता,अन्याय, अत्याचार का डेरा,
पंच परमेश्वर में छिपा है सिध्दांतों का दर्द,
निर्मला, गबन,गोदान,कर्मभूमि है बड़ा ग्रन्थ,
ठिठुरती ठंडी में कर्मशीलता और आलस्य बयाँ करती पूस की रातें कितनी सर्द।
आओ मनाएं जयंती याद करें उस मसीहा को,और
जग में बाँटे झूठी मुस्कानों का दर्द।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर, (छ .ग.)
*व्याख्या*-प्रस्तुत कविता में प्रेमचंद की रचनाओं में छुपे भावों जैसे पीड़ा,बेबसी,शोषण,
अन्याय, तथा सामन्त शाही के दुर्गुणों के बारे में लिखा गया है।
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