जिला :- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
विषय :- कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद
कहे जग "कथा सम्राट" जिन्हें,
थे कलम के जादूगर।
शब्दों के मोह जाल में बांधे,
रहते उर में जादूकर।
क्या क्या लिखूं? थे कलमकार वे,
निर्मला, गबन, गोदान दिया।
कथा की ऐसी रचना की,
साहित्यिक हृदय को हर लिया।
थे सादे, वे सरल मिजाजी,
समरसता मन में बसी।
सादा ही परिधान था उनका,
विरले ही दिखती मुख में हँसी।
लिखते थे जीवन का सुख दुख,
लिखते समाज की तकलीफों को।
अपने कलम की चोट करते,
नकाबपोशी नौकरशाहों को।
भले नहीं है संग अभी वे,
पर कलजयी उनकी रचनाएं।
मनमोहक थे शब्द उनकी,
है मनोरम उनकी कथा विधाएं।
व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी के जीवन पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है।
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