Friday, July 17, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना:- रंगीला

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
शीर्षक -"रंगीला छत्तीसगढ़"
विधा- छंदमुक्त कविता
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आनी बानी के तिहार आवे
छत्तीसगढ़ के रंग बढ़ावे

हरेली म पूजा ला पाथें
गांव  घर  के  देवनार

सावन में  झूला  हे  डरे 
झूले बर सबो झन  तियार 

रथ म नुआ ओंढा पहिरे
घर  भर  के जमो  रहार

बइला सजे हे पोरा तिहार 
नवाखाई मा जुटे परिवार 

अघन झूठी पकाए सुआरी
घर   अंगना  अउ  दुवार

अबर   मीठ   लागे  जी 
घानी  म  पेरे   कुशीयार 

आनी  बानी के हाट बाट  
करथें सबो  दीप   तिहार 

घूम- घूम  लइका सियान 
छेरछेरा  म   मांगे  धान 

गुड़ तिल  के जोड़ी  हवे 
मकर के लाड़ू हे पहिचान 

भांग म  माते   फगुनिया 
फागु  के  अबर  चुपरान 

रकम रकम के मिठाई बनथे
ठठरी,खुरमी,अरसा के खान 

मोर छत्तीसगढ़ के अबर रंग 
एला लोजी तुमन पहिचान

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