स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
शीर्षक -"रंगीला छत्तीसगढ़"
विधा- छंदमुक्त कविता
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आनी बानी के तिहार आवे
छत्तीसगढ़ के रंग बढ़ावे
हरेली म पूजा ला पाथें
गांव घर के देवनार
सावन में झूला हे डरे
झूले बर सबो झन तियार
रथ म नुआ ओंढा पहिरे
घर भर के जमो रहार
बइला सजे हे पोरा तिहार
नवाखाई मा जुटे परिवार
अघन झूठी पकाए सुआरी
घर अंगना अउ दुवार
अबर मीठ लागे जी
घानी म पेरे कुशीयार
आनी बानी के हाट बाट
करथें सबो दीप तिहार
घूम- घूम लइका सियान
छेरछेरा म मांगे धान
गुड़ तिल के जोड़ी हवे
मकर के लाड़ू हे पहिचान
भांग म माते फगुनिया
फागु के अबर चुपरान
रकम रकम के मिठाई बनथे
ठठरी,खुरमी,अरसा के खान
मोर छत्तीसगढ़ के अबर रंग
एला लोजी तुमन पहिचान
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