जिला- दुर्ग
विधा-छंद मुक्त कविता
शीर्षक-छत्तीसगढ़ की पहचान
*छत्तीसगढ़ की पहचान*
आओ सबको छत्तीसगढ़ की गाथा सुनाते हैं,
महानगरीय चकाचौंध से दूर ले जाते हैं,
कर्मभूमि जो है भगवान श्री राम की,
मीठी बोली यहांँ की है छत्तीसगढ़ी।
भारत का हृदय स्थल छ.ग. अपना,
सांस्कृतिक धरोहरों की नगरी कहलाती यह,
हरियाली एवं धरोहरों का है भंडार,
अरपा पैरी की धार,महानदी है अपार।
तीन नदियों का है त्रिवेणी संगम,
प्रयागतीर्थ कहते जिसे राजिम है,
प्रसिद्ध यहांँ का नृत्य, मेला, मढ़ई उत्सव,राउत नाचा,
बस्तर का दशहरा हो या रायगढ़ का गणपति पूजा।
पंडवानी, पंथी,करमा,ददरिया या हो मंत्र,
वाचिक परंपरा में बहती यहांँ स्वर लहरी,
धोती पटका,साड़ी पोलखा सादा यहांँ का लिबास,
उपजते फसल से कहलाता धान का कटोरा खास,
लुभाते यहांँ के घने जंगल, जलप्रपात,
काष्ठ, बांस,मिट्टी की बनी शिल्पकला ,
साधारण जन-जीवन यहांँ की पहचान,
बोरे-बासी,चीला फरा बबरा है स्वादिष्ट व्यंजन।।
अनुरमा शुक्ला
दुर्ग(छ.ग.)
Wow.... You're the best. I adore you Mumma. 🥺❤️
ReplyDeleteits just too awesome aunty ji 🙏🙏💖
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ReplyDeleteBest best best��
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ReplyDelete💕💓💞💞❤️❤️❤️🥰😍😍😘😘
Deleteबहुत ही उम्दा पिरोया है शब्दों को।
ReplyDeleteMsttttttt
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ReplyDeleteबहुत सुंदर 💯💯💯💯
ReplyDeleteGreat👍👍
ReplyDeleteVery beautiful work aunty ��
ReplyDeleteBeautiful ❤️
ReplyDeletegreat lines Aunty Ji🙏👌👌
ReplyDeleteAwsome writing
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ReplyDeleteSo good 😍
ReplyDeleteAwesome ❤️
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ReplyDeleteBahut pyaara❤️
ReplyDeleteso nicely written ��❤️❤️
ReplyDeleteबहुत प्यारा ❤️
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ReplyDeletebahut khoob
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ReplyDeletenice ❤️❤️
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ReplyDeleteYou are always best aunty❣
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