रचनाकार 'एच-एस-अरमो,अरमान ।
निवास-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक - ""मेरी संस्था ""
विधा--रेखाचित्र लेखन ।
====================
•°•~~¤ मेरी संस्था ¤~~•°•
*************
मेरी संस्था छत्तीसगढ़ राज्य की महिलाओं के तकनीकी ज्ञान और कौशल विकास के लिये एक अलग पहचान है ।मेरी संस्था का नाम "शासकीय कन्या पाँलीटेक्निक,बैरन बाज़ार,रायपुर"छत्तीसगढ़ है।यहाँ महिलाओं/कन्याओं के लिए आठ ब्रांच /तकनीकी विषयों की पढ़ाई हेतु व्यवस्था है ।संस्था के तकनीकी पाठ्यक्रम "ए आई सी टी ई "नई दिल्ली एवं एक पाठ्यक्रम डिप्लोमा फार्मेसी की "पी सी आई"द्वारा मान्यता प्रदत्त है ।संस्था के शैक्षणिक व परीक्षा संबंधी कार्यों के रूप में "सी एस वी टी यू ,भिलाई,छ.ग -से संबद्धता है। यहाँ शैक्षणिक समस्त सुविधाएँ उपलब्ध हैं ।
संस्था में संचालित पाठ्यक्रमों की सूची निम्नांकित हैं:--
1-मार्डन आफिस मैनजमेंट (त्रि-वर्षीय)
2/इलेक्ट्रॉनिक्स एण्ड टेलीकम्युनिकेशंस इंजीनियरिंग (त्रि-वर्षीय)
3/कम्प्युटर साईंस इंजीनियरिंग (त्रि-वर्षीय)
4/इन्फार्मेशन टेक्नालॉजी (त्रि-वर्षीय)
5/सी डी डी एम (त्रि-वर्षीय)
6/इंटीरियर डेकोरेशन (त्रि-वर्षीय)
7/आर्किटेक्चरल असिस्टेंट(त्रि-वर्षीय)
8/डी फार्मेसी (दो -वर्षीय)
उपरोक्त ब्रांचों में प्रवेश--इंजीनियरिंग विषयों हेतु "पी पी टी "प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ।
एवं नाँन-इंजीनियरिंग विषयों के लिए मेरिट के आधार पर ।
व डी फार्मेसी -पी पी एच टी,प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ।
*कुछ कोर्स 10 वीं के आधार पर,कुछ कोर्स 12 वीं के आधार पर ।
"संचालक तकनीकी शिक्षा,छत्तीसगढ़ "की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं ।प्रति वर्ष प्रवेश प्रक्रिया जून महीने से प्रारंभ हो जाती है ।(विशेष परिस्थिति में टाईम -टेबिल में परिवर्तन संभाव्य है)जैसे-कोरोना संक्रमण के कारण । कुछ पाठ्यक्रमों के आधार पर डिप्लोमा के बाद आगे की पढ़ाई पूरी करने की सुविधा है ।सभी पाठ्यक्रम रोजगार/स्वरोजगारोन्मुखी हैं ।
आज महामारी काल के कारण प्रवेश की प्रक्रिया में विलम्ब हो गया है ।परीक्षा कार्य भी प्रभावित हुआ है ।आज संस्था में विरानी सी छायी हुई है ।सिर्फ़ शिक्षकों व कार्यालय स्टाफ ही आ रहा है ।ऐसी स्थिति में संस्था की साफ-सफाई व मरम्मत जैसे कार्य करने पड़ रहें हैं ।संस्था परिसर में स्थापित केन्टीन भी बेजान पड़ी है ।क्योंकि इस कोरोना वायरस के संक्रमण से सभी में फैलाव से बचने की पड़ीं है ।सभी लोग सुरक्षा बचाव के उपायों का ध्यान रखें हैं ।जबकि इस समय एडमिशन -काऊन्सलिंग की प्रक्रियाएँ चालू रहतीं ।कभी-कभार कोई पालक/छात्रा प्रवेश की जानकारी लेने आ जाते हैं वरना शैक्षणिक सत्र की शुरुआत का पता भी नहीं चल रहा है ।
मेरी संस्था का वर्तमान में इससे बेहतर रेखाचित्र के रूप में वर्णन कर ही नहीं सकते हैं ।संस्था अपने आप से कह रही है:--
"मैं बेज़ुबान हूँ,पर बेजान तो नहीं,
आज पतझड़ की बयार है,तो
कल महकते,गुले-गुलजार होगा "
=========इति==========
भाव:--समय परिवर्तनशील है और इसके सामने सब मजबूर हैं ।आज कलिमा छाई है तो कल उजाले की खुशनुमा माहौल व सौगात होगी ।
======================
No comments:
Post a Comment