जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा- रेखा चित्र पर आधारित लेखन
शीर्षक -- चिड़िया
व्याख्या -लेखक के द्वारा अपने अपने बचपन का स्मरण करते हुए चिड़िया के बारे में वर्णन किया गया है ।
************************************************ चिड़िया
च से मैंने चिड़िया की रेखाचित्र बनाया और उस पर लिखना प्रारंभ कर दिया । मुझे आज भी वो बात याद है मेरे माता-पिता दोनों ही कहा करते थे । देखो बेटा कोई भी प्राणी हो अगर खाने की कोई वस्तु है अगर खा जाती है तो खा जाने दो उसे भगाने के लिए डण्डा लेकर नहीं दौड़ना चाहिए नहीं मारना चाहिए नहीं पकड़ कर तंग करना चाहिए खा लिया है तो कोई बात नहीं ईश्वर ने सबको बनाया है सबकी पूर्ति करने वाला वही है अगर तुम्हारा थोड़ा सा नुकसान हो गया है तो उसकी भरपाई ईश्वर कर देगें । तुम्हारा जितना नुकसान हुआ है उससे ज्यादा फायदा में रहोगे ।इस कारण से गाय बैल भैंस बड़ा जानवर होने के कारण मैं आज भी डरता हूं पत्नी ही देखभाल करती है बांधना पैरा भूसा खिलाना सब वह करती हैं । मैं बचपन से ही कुत्ता को डरता हूं उसे देखकर दूर भागता हूं मैं गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ रहा था घर से लगभग दो किलोमीटर की दूरी पर विद्यालय है रास्ते में एक घर पड़ता है रास्ते में ही वह घर था रोज रास्ते पर ही कुत्ता बैठा रहता था जिस दिन कुत्ता बैठा रहता था दूसरे रास्ते से मैं घुमकर जाता था । मैं जब भी उस रास्ते से गुजरता था चौकन्ना होकर गुजरता था । उसी प्रकार मुझे बचपन से आदत है चिड़िया जैसी बोलती है बोलने की कोयल जब बोलती है उसी तरह आवाज निकालने की जैसे ही वह बोलना प्रारंभ करती है आप भी बोलना शुरु कर दीजिए पर वह बार बार बोलती है । आप जब तक बोलते रहेंगे तब तक बोलती रहेगी ।
चिड़िया को मैंने पिजड़ा में कभी नहीं पाला लेकिन स्नेह जरुर रखता हूं आंगन में उस समय बहुत से चिड़िया आते थे
उनके चलने खाने पानी पीना सबको मैं बड़े गौर से देखता रहता हूं ।
मैं बच्चों को भी समझाता हूं कोई भी प्राणी को चोट नहीं पहुंचाना है । चाहे गाय हो बकरी हो या चिड़िया हो । दाना
कुछ खाने की वस्तु बिखरा रहता है खाकर चले जाते हैं ।
अब तो गौरेया बहुत खुश।
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