Thursday, July 9, 2020

महासमुंद से विनोद कुमार "जोगी" की रचना- सावन

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
भाव :- निर्वेद
शीर्षक :- सावन
######################

ओ घटा घनेरी घुमड़ - घुमड़,
पवन पुरवाईया साथ लिए।
ला रही नव‌ उल्लास उर में,
मोतियों की बरसात लिए।
बरखा बरस कर धरा में,
तृण - तृण भिगोने आई है।
तपती धरा थी कब से प्यासी,
प्यास बुझाने आई है।
नव आस लिए यह मास है जो,
भरे भक्ती भाव से सावन।
हर हृदय झंकृत करती,
आई देखो पावस पावन।

व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने सावन के महीने के आने की बात को बहुत ही सुन्दर तरीके से प्रकट करने का प्रयास किया है।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...