जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-अंधविश्वास की बेड़ियां
काट डालो तुम अंध विश्वास
की जकड़ी हुई बेड़ियां,
कुप्रथाओं के जाल में
फंसे समाज के लोगों को,
आह्वान है मेरा सुन ले,
अंतर्मन की वेदना को।
बेटा कुल का संचालक है
और बेटी है पराया धन
इस धारणा ने लिंग भेद
को जन्म दिया समाज में
दुष्प्रथाओं के भंवर को।
बलिप्रथा ने निहत्थे मूक
मासूम जीवों को सताया
और बेरहमी से जान लिए।
छुआछूत और भूत प्रेत ने
संस्कृति को त्रास दिए।
टोना- टोटका के चक्कर में,
प्रगति का रथ रुका रहा,
अज्ञानता और अशिक्षा से
झाड़- फूंक ने मानवता को
तार -तारकर प्राण लिया ।
आओ मिलकर आज प्रण लें,
तिमिर को दूर भगायेंगे,
शिक्षा का एक दीप जलाकर,
अंधविश्वास भगायेंगे और
नया बिहान हम लायेंगे।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर, छग
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