विधा,,,आलेख
विषय,,, *शिक्षा का वर्तमान परिदृश्य*
रचनाकार श्रीमती पदमा साहू खैरागढ़ छत्तीसगढ़
प्राचीन काल की शिक्षा प्रणाली गुरुकुल पर आधारित थी गुरुकुल और ऋषि आश्रमों में शिक्षा दी जाती थी। विद्यार्थी अपने घर परिवार से दूर ऋषि आश्रमों में रहकर एकाग्र चित्त होकर गुरु के आदेशों का पालन करते हुए शिक्षा ग्रहण करते थे।
प्राचीन काल में गुरु को भगवान का दर्जा दिया जाता था और गुरु की कही हुई बात को शिरोधार्य कर उनको सम्मान दिया जाता था यह प्राचीन परंपरा थी । धीरे - धीरे शिक्षा प्रणाली में बदलाव आते गया और नई तकनीकों का उपयोग होने लगा शिक्षा में नई तकनीकों के उपयोग से शिक्षा का मार्ग सरल तो हो गया परंतु उनका विकास के साथ-साथ विनाश की ओर भी प्रभाव बढ़ गया।
21वीं सदी के वर्तमान परिदृश्य में शिक्षा प्रणाली में इतना बदलाव आ चुका है कि स्कूलों में शिक्षक बच्चों को उनकी गलतियों के लिए डांट फटकार भी नहीं लगा सकते ।वर्तमान शिक्षा परिदृश्य इतना बदल चुका है कि बच्चों द्वारा गलत कदम उठाने पर , गुरु मार्ग बता दे तो बच्चें अपना अपमान समझते हैं ।
शिक्षा का वर्तमान परिदृश्य धीरे-धीरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का रूप लेते जा रहा है बच्चे स्कूल में शिक्षा के साथ-साथ घरों में ऑनलाइन क्लासेस को ज्वाइन कर रहे हैं, ऑनलाइन कोचिंग ऑनलाइन ट्रेनिंग, इस प्रकार से तकनीकी युग बढ़ते जा रहा है जो किसी एक हद तक सही है किंतु यह ज्यादातर नुकसानदायक है। इससे बच्चे जो सुविधाएं मिल रही है उनका सही उपयोग नहीं कर रहे है। वर्तमान समय प्रतिस्पर्धा का युग है जिसमें बच्चें अपनी क्षमता का विकास, बुद्धि कौशल का प्रदर्शन और भावनाओं को व्यक्त करने में सिमट गए हैं इसमें मानव मस्तिष्क पर जोर पड़ रहा है और बच्चे संकुचित होने लगे हैं।
माता-पिता भी बच्चों से ज्यादा अपेक्षा रखते हैं जिसके कारण बच्चे बोझिल और तनाव महसूस करते हैं और कई बार अपनी इच्छाओं को मारकर अपेक्षा को पूरा करने के चक्कर में सही दिशा से भटक जाते हैं, उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर पाते हैं। यह शिक्षा का एक दोष है क्योंकि जब बच्चे असफल हो जाते हैं तो दूसरे बच्चे से अपनी तुलना करते हैं और अपने आपको उनसे नीचा समझने लगते हैं।
कभी-कभी तो लगता है कि शिक्षा का पर्याय ही बदल गया है कई जगहों पर बच्चे की प्रतिभा को प्राथमिकता ना देकर भ्रष्टाचार के कारण प्रतिभा संपन्न बच्चे पिछड़ जाते हैं और किसी दूसरे को स्थान मिल जाता है । वर्तमान में तो अभी जो करोना काल चल रहा है इसमें तो शिक्षा का अर्थ पूर्णतः बदल गया है कि स्कूल बंद होने के कारण बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं ऑनलाइन पढ़ाई चालू हो गई है और ऑनलाइन पढ़ाई में ग्रामीण अंचल के गिने-चुने बच्चे ही शामिल हो पाते हैं और बाकी बच्चे पिछड़ जा रहे हैं। यह शिक्षा का समानता नहीं हुआ कुछ ही बच्चों को इसका लाभ मिल पा रहा है और बाकी बच्चे छूट जा रहे हैं यह शिक्षा वर्तमान परिदृश्य में सही नहीं लगता है ।अतः हमें शिक्षा के इस युग में वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए ऐसी प्रणाली की आवश्यकता है जो सभी को सरलता से शिक्षा सुलभ करा सकें और और सभी को शिक्षा का अर्थ समझा सकें जिससे कोई छूट न पाए सब को इसका लाभ मिल सके।
श्रीमती पदमा साहू खैरागढ़ छत्तीसगढ़ राजनांदगांव
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