जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-हरेली तिहार
विधा-कविता (मुक्त छंद)
हरिहर -हरिहर दिखय संगी जम्मो कोति खेती-खार।
आगे देखव संगी हरेली छत्तीसगढ़ के पहली तिहार।।
बड़े बिहनिया राऊत बबा नीम डारा खोंचे बर आइस।
लोहार भ गया घर मुहाटी के चौखट म खीला ल गडाइस।।
नान्हें ल इका मन गेड़ी बनाइन
दाई चीला राधिस।
रांपा कुदारी हंसिया टंगिया बबा
धो के लानिस।
डोकरा बबा होम जग देके पहली पूजा करथे,
चीला रोटी भोग लगाके नरियर ल फोडथे।
जुरमिल के सब झन माथ नवाथे जरयाथे परिवार।
आगे देखव हरेली संगी छत्तीसगढ़ के पहली तिहार।।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,छग
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