कवि - सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"
जिला-महासमुन्द (छत्तीसगढ़)
भोर हुई जागा सोया सूर्य।
चपल चमक से अपनी।
मन का अंधियारा मिटाओ।
मृग तृष्णा का अंत करो अब।
मन का ज्योत जलाओ।
नव सृजन कर नवनिर्माण करो।
आरुणि आभा तुम बिखराओ।
जन जन का कल्याण हो यहाँ।
जन में जागरूकता फैलाओ।
मुदित हो जाये मन सबका।
आओ दिनकर झलक दिखलाओ।
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