Monday, July 20, 2020

रायगढ़ से मोनालिसा बेहरा की रचना- पर्यावरण और हरियाली

रचियता- मोनालिसा बेहरा
रायगढ़,छत्तीसगढ़
विषय- पर्यावरण और हरियाली विशेषांक
विधा- छंद मुक्त

शीर्षक- हरियाली आई

देखो हरियाली छाई है
धरा पे निखार लाई है
जीवनदाता किसानों के 
चेहरे पे मुस्कान लाई है

सौंधी-सौंधी खुशबू से
घर-आँगन महक रहे
पक्षी भी अपने डाल-द्रुम 
  पे झूल-झूल के चहक रहे

पर्यावरण का ये श्रृंगार 
आज दुल्हन सा इतरा रहा
हरे-भरे पगडंडियों पे
मन बावरा सा झूम रहा

कल-कल करती नदियों
का सुर मन को भा रहा
बादलों का गर्जन सुन
नाचने को मन मचल रहा

इस जल -आप्लावित धरा पर
नाचती-गाती बयार छाई है
देखो हरियाली आई है
खुशियों की सौगात लाई है।

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