रायगढ़,छत्तीसगढ़
विषय- पर्यावरण और हरियाली विशेषांक
विधा- छंद मुक्त
शीर्षक- हरियाली आई
देखो हरियाली छाई है
धरा पे निखार लाई है
जीवनदाता किसानों के
चेहरे पे मुस्कान लाई है
सौंधी-सौंधी खुशबू से
घर-आँगन महक रहे
पक्षी भी अपने डाल-द्रुम
पे झूल-झूल के चहक रहे
पर्यावरण का ये श्रृंगार
आज दुल्हन सा इतरा रहा
हरे-भरे पगडंडियों पे
मन बावरा सा झूम रहा
कल-कल करती नदियों
का सुर मन को भा रहा
बादलों का गर्जन सुन
नाचने को मन मचल रहा
इस जल -आप्लावित धरा पर
नाचती-गाती बयार छाई है
देखो हरियाली आई है
खुशियों की सौगात लाई है।
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