Thursday, July 2, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- श्लेष अलंकार में

रचनाकार :- नलिनी बाजपेयी
           संबलपुर, जिला-कांकेर,
                    (छ.ग.)
विषय :- श्लेष अलंकार से संबंधित 

शब्दों की माया बड़ी
सुबरन चाहते सब कोई,
     कवि ह्रदय,, रसिक प्रिय
     सबके मन एक होई।

मार्तण्ड सा 
मार्तण्ड बनना चाहे,
        सुनहरे कर को 
        कर में धरना चाहे।

कनक बाला 
पहनी बाला,
        कनक सुमन चढ़ाएं 
        शिव भोला -भाला।

हर की गली चली 
हरने भंग का प्याला,
        हरि के रंग में रंग गई
        हरि की शाला।

    श्लेष अलंकार का प्रयोग :-
सुबरन :-
            सुबरन - सुंदर वर्ण
             सुबरन - सोना

मार्तण्ड :-
             मार्तण्ड - सूर्य
             मार्तण्ड - एक नाम
 कर :-
        कर - किरण
        कर - हाथ
कनक :-
           कनक - सोना
           कनक - धतूरा
बाला :-
        बाला - कान का आभूषण
        बाला - लड़की
हर :-
     हर - शिव
     हर - लूटना

     नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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