Tuesday, July 28, 2020

दुर्ग से अनुरमा शुक्ला की रचना- नदी

रचनाकार -अनुरमा शुक्ला
स्थान-दुर्ग (छ.ग.)
विधा-सायली छंद
शीर्षक-नदी

          *नदी*


पर्वत 
हिम पिघलती
बनती धारा निर्झर
बहती चंचल
  निर्मल


प्राकृतिक 
सौंदर्य निखारती
धरा ऊपजाऊ बनाती
वायु शीतल
  बहाती ।

सतत्
बहती नदियाँ
सीख हमें देती
चलता चल
अनवरत ।


थकना
नही कभी
थमना भी नहीं
कर्म कर
निरन्तर।


पावन
पवित्र धारा
चंचल चपल सरिता
चलती पथ
   समतल ।

व्याख्या-नदियाँ हमे निरन्तर चलने का सीख देती है बिना रूके कर्म करने का ।

4 comments:

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...