रचनाकार-पवन गौतम बमूलिया
राज्य- बाराँ(राजस्थान)
शीर्षक- अब जाग मुसाफिर
अब जाग मुसाफिर,
पकड मोबाइल
तुझको जीत कर आना है ।
अब देख समय है पलट गया ।
स्मार्ट फोन उठाना है ।।
यह अर्जुन का गाँडीव धनुष,
यह नारद का करताला है !
इसे बजरंगी की गदा समझ,
यह परशुराम का भाला है !!
यह देव अस्त्र ,महादेव शस्त्र,
यह खडग कृपाण निराला है !
अणु, परमाणु ,बम,मिसाइल
नेटवर्क रखवाला है!!
अब बिना ना इसके काम चले
फाइव जी वाला ही पाना है ।
अब जाग मुसाफिर
पकड मोबाइल
तुझको जीत कर आना है ।।
अब देख समय है पलट ......
यह रामबाण ,यह अचूक धार,
यह कलयुग सुदर्शन चक्र बना!
यह तीर कमान समय का है
पाकर खुद को बेफिक्र बना !!
इसके बिना एक पल सम्भव ,
जीने की कोई उम्मीद नहीं!
ना होली ना ही दीवाली
बिन मेसेज के ईद नहीं !!
कविता सविता वनिता ललिता
बेटरी को चार्ज लगाना है।
अब जाग मुसाफिर
उठा मोबाइल
तुझको जीत कर आना है।।
अब देख समय है पलट.....
चाहे हो स्कूल या ऑफिस,
भाई इसके बिन ना काम चले!
*स्माइल क्लास* चले इससे
इसके बिन पत्ता भी ना हिले !!
चाहे *टीचर ट्रेनिंग* हो चाहे
हरपल कोई डाक भिजवाना है।
अब जाग मुसाफिर
उठा मोबाइल
तुझको जीत कर आना है।।
अब देख समय है पलट......
घण्टो का काम मिनटों में हो,
बचे, समय, भागादौड़ी !
इसमें ही बैंक,व्यापार चले
रखना बस सावधानी थोड़ी!!
अब कोरोना महामारी की भी
जानकारी इसी से पाना है।।
अब जाग मुसाफिर
उठा मोबाइल
तुझको जीत कर आना है।।
अब देख समय है पलट गया।
स्मार्ट फोन उठाना है।।
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(विशेष-उपरोक्त रचना मोबाइल के
समय सदुपयोग का समर्थन करती है दुरुपयोग का नही।)
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*पवन गौतम बमूलिया*
2/12 हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी
अंता जिला बाराँ(राज)
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