जिला----जांजगीर -चाम्पा
राज्य---छत्तीसगढ
विधा---कविता (जीवन पर आधारित)
शीर्षक --- ऐसा हो जीवन
व्याख्या ---कवि के द्वारा सर्वोत्तम जीवन की कल्पना की गई है ,उसको जीवन में उतारने पर सम्पूर्ण मानव समुदाय की भलाई है ।
************************************************
ऐसा हो जीवन
जीवन मिला है मानव का ।
मानव की तरह सब बने ।
उसी का होता जग में नाम ।
जो लोहे का चबाये चने ।
जीवन मधुर मधुर हो ।
जैसे रस भरी गागर ।
ऐसे जीवन सजा चलिए।
दिशा दिशा मिले आदर ।
गुणों का ग्राहक बनें ।
गुण बांटे चहूं ओर ।
दुर्गुणों से घृणा नहीं ।
दुर्गुण का रोकें भोर ।
सत्य, धर्म ,और कर्म का ।
साथ दे पालन करें ।
असत्य, अधर्म,अकर्म का ।
अन्जाने भी न दामन धरें ।
जीवन सहज मृदुल मनोहर ।
सुख दुख से परे सरोवर ।
प्रशंसा करें निंदा से बचे ।
चलें परहित थामें डोर ।
राम कृष्ण का जीवन ।
सीखने समझने प्रर्याप्त ।
क्या होना चाहिए जग में सोचे ।
और क्या है यहां पर ब्याप्त ।
परिवर्तन प्रकृति का नियम ।
जीवन से उसे जोड़ रखें ।
गौतम, महावीर, तुलसी, कबीर ।
जैसे मिले चादर ओढ़ रखें ।
भले हो कुछ पल का जीवन ।
उदाहरण के काम आए ।
समस्या से भरे मानव के लिए ।
उसके निवारण का काम आए ।
जीवन कांटे नहीं हां।
फूल की तरह सुशोभित होते ।
आओ ऐसी बनाएं जीवन ।
जो सबको देखते ग्रहित होते ।
धरा पर एक से एक मानव ।
एक से बढ़कर एक जीवन ।
जीवन अपना सबका हो संगम ।
धरा पर न हो ऐसा किसी का जीवन ।
गिरधारी लाल चौहान
No comments:
Post a Comment