Wednesday, July 22, 2020

रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना- जीवन- पहेली

☆रचनाकार-एच-एस-अरमो,अरमान
☆स्थान-बैरन बाज़ार,रायपुर ।
☆जिला-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
☆शीर्षक --•°° जीवन-पहेली °°•--
 ☆विधा--छंद-मुक्त (कविता)
☆☆☆▪▪☆☆☆▪▪☆

    ▪▪जीवन-पहेली ▪▪
              ¤¤¤¤¤¤¤
जीवन की,आपाधापी में,
कुछ हुये,अपने,
और कुछ हुये,पराये ।
बचपन से लेकर,
आज तक,
हुयी जीवन में,कई हलचल ।
जहाँ,माता-पिता का--
मिला है,खूब लाड़-प्यार,
शिक्षा-दीक्षा और कई नजीर ।
समाज से,जब मेरा सरोकार हुआ,
ज्यों- ज्यों मैं बढ़ता गया,
भला-बुरा क्या है,मैं समझता रहा,
समय गतिक्रम ने,हमें बेहतर बनाया।
वैवाहिक जीवन की राह---
खट्टी मीठी यादों की,थी राह,
फिर आयी,सन्तानों की सौगात,
समाज में,ये बन गई,सम्मान की बात।
जीवन एक पथरीली राह है,
उसमें,चलना-सम्हलकर होता है,
जीवन मंझधार में,गोते लगाना होता है,
कभी नैय्या पार होती रहती है,
तो कभी,तूफानों से बचना होता है ।
 आज जीवन में कोरोना छाया,
पाँजिटिव से दूर रहें ,
निगेटिव के पास रहें ।
मास्क लगाये,हाथों को धोयें ,
घर से,ना निकलें,इम्युनीटी बढ़ायें ,
ये बात,दैनिक जीवन के,अंग बनें ।
इंटरनेट का,हमारे जीवन में,
अचानक,महत्व बढ़ा है,
आपसी बातचीत को,इसने निगला है,
मोबाइल चैटीँग ने,किया पगला है ।
व्हाट्स-अप,फेसबुक,सोशल हुये,
आँंनलाईन-सेनिटाईज जीवन हुये,
रिश्ते बने,लफ़ड़ा हुआ और फँस गये,
कुछ के तलाक हुये,
और कुछ मौत की गोद में,सो गये ।
कैसी आज,जीवन में झंझावत है,
आगे बढ़ते रहने की होड़ है,
और इंसानियत,सरेआम मर रही है,
ताम-झाम ,दिखावा जिसके पास है,
वैसे लोगों की,क्यों होती ,धाक है ।
जीवन-जीने की,जीवन शैली,
भी ,कैसी अब ,बदल रही,
मौत होवे,जब अपने या पराये की,
कांधा दे सकते नहीं--?
देख-छू सकते नहीं---?
बीस लोग ही,शामिल हो सकते हैं ।
पहले,जब भी मरते थे लोग,
हजारों की होती थी भीड़,
उसकी हैसियत व साख की,
होती थी बातें,खूब जनमानस में ।

पर अफसोस है,कोरोना वायरस ने,
जीवन में,सामाजिक दूरियाँ हैं बढ़ाई,
तनावग्रस्त ,अभावग्रस्त बना दी है,
इस आफ़त से निकलना है,तो 
धैर्यता को सामने रख,जीना होगा,
यही सीख,हमें जीने का सिखाना होगा।
=========इति===========
*मौलिक प्रस्तुति-अरमो,रायपुर,छ.ग-

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