रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर
विषय-जिंदगी
विधा -गजल
*गजल*
क़ाफिया-आस
रदीफ- रहे
ज़िन्दगी में दीदार - ए - उल्फत की आस रहे,
मज़े से कटेगी ज़िन्दगी जब वो पास रहे।
यही मिन्नत है मेरी औ यही गुज़ारिश है,
तुम हरदम मेरे साथ हो बस यही एहसास रहे।
ग़म - ए - दास्तां सुनाने से भला क्या फायदा,
मिलते रहे सदा प्यार से हम जहां को भी विश्वास रहे
चलो मुहब्बत में हम कुछ ऐसा कर जाएं,
कि हमारी मुहब्बत का ज़माने में इतिहास रहे।
ज़िन्दगी में रंज - ओ - गम के किस्से तो बहुत है " नलिन ",
पर सीने में मुहब्बत की हरदम प्यास रहे।
व्याख्या-उपरोक्त कविता में प्रियतम के हमेशा पास रहने की बात कही गई है।
नलिनी बाजपेयी
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