दिनांकः-21/7/20 ,मंगलवार ।
रचनाकार-एच-एस-अरमो " अरमान "
स्थान-बैरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक- ""सपना ""
विधा --छ्न्द-मुक्त ,कविता ।
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व्याख्या:- इस कविता के माध्यम से
यह कहना चाहता हूँ कि मैंने
सपना देखा और सपने में
पाया कि धरा में पड़ने वाले
प्रभाव का असर क्या हो गया ।
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सपना
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एक रात ,देखा मैंने इक सपना,
सपने में देखा था,सबकुछ अजूबा,
खेत है,पर फसलें नहीं,
तालाब है,पर पानी नहीं,
पानी है तो,उसमें मछलियाँ नहीं,
मछलियाँ हैं तो,पकड़ने जाल नहीं,
जाल है तो,पानी में---
फैलाने की,मुझमें,ताकत नहीं ।
जंगल है,पर वहाँ पेड़ नहीं,
पेड़ नहीं तो,कोई जंगली जानवर नहीं,
जंगली जानवर और पेड़ भी नहीं,तो
इस धरा में,फिर पर्यावरण संतुलन नही।
जब सपना टूटा,नींद खुली तो,
मैंने सोचा,पर्यावरण संरक्षण हेतु,
आओ हम,एक-एक पौधा लगायें,
जल-संग्रहण के,महत्व को समझें ।
आर्थिक असमानता को,दूर करें,
स्वरोजगार व कुटीर उद्योगों के,
गाँवों में,जाल-सा ,फैलाव करें,
आत्मनिर्भरता की,जनक्रांति लावें ,
देश-उन्नति में,अपना अंशदान करें ।
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*मौलिक-प्रस्तुति-अरमो,रायपुर ।
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