Tuesday, July 21, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक जी की कविता:- ख्वाब

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
शीर्षक -"ख़्वाब"
विधा- छंदमुक्त कविता
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ख़्वाब में आता है,  जब  कोई
जाने क्यूँ, ना जानु कैसे मैं सोई ।

             देखूं मैं उसको, देखे  जो  मुझको
             कुछ ना कहे जो,मैं क्या कहूँ उसको।

मेरे जहन में, जागने लगे हैं अरमां
गर कुछ कहे तो,बन जायेगा शमां ।

              नज़रें टकराती हैं, नज़रों  से जब
              हाले दिल बयां हो,मुस्काते हैं लब ।

करीब जब,आने लगते हैं वो
जाने ख़्वाब,टूट जाता है क्यों ?

               ऐ  खुदा, इल्तज़ा  है  तुझसे  मेरी
               ख़्वाब जब आये,आँखें ना खुलें मेरी ।

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