रचयिता- पुष्पा पटनायक
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
शीर्षक -"ख़्वाब"
विधा- छंदमुक्त कविता
************************
ख़्वाब में आता है, जब कोई
जाने क्यूँ, ना जानु कैसे मैं सोई ।
देखूं मैं उसको, देखे जो मुझको
कुछ ना कहे जो,मैं क्या कहूँ उसको।
मेरे जहन में, जागने लगे हैं अरमां
गर कुछ कहे तो,बन जायेगा शमां ।
नज़रें टकराती हैं, नज़रों से जब
हाले दिल बयां हो,मुस्काते हैं लब ।
करीब जब,आने लगते हैं वो
जाने ख़्वाब,टूट जाता है क्यों ?
ऐ खुदा, इल्तज़ा है तुझसे मेरी
No comments:
Post a Comment