संबलपुर, जिला-कांकेर,
(छ .ग.)
शीर्षक :- *जनसंख्या नियंत्रण*
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*जनसंख्या नियंत्रण*
धरती का सर्वोत्तम जीव
मानव कहलाया है,
आदिकाल से चलते-चलते
विकास पथ पाया है।
जंगलों में रह कंदमूल खा
पर्ण वस्त्र धारा था,
आज बंगलों में रह सर्व
सुविधायुक्त जीवन पाया है।
विकास संग-संग आबादी
का बाढ़ भी है आया,
घटती सुविधाओं संग
धरा का बोझ है बढ़ाया।
संसाधनों की कमी हुई
पोषण भी गड़बड़ाया।
अन्न,जल की कमी से
मानव ने खुद को उलझाया |
वह दिन दूर नहीं
जब रहने को घर नहीं
ना सड़क ही पाएगा।
ना कपड़े ना पेट भर
भोजन मिल पाएगा,
हर चीज के लिए
मारकाट मच जाएगा।
जनसंख्या नियंत्रण
को अपना लो,
समय रहते सुलझा ले
नहीं तो पछताएगा।
*व्याख्या* :- उपरोक्त कविता में
मानव की विकास यात्रा के साथ
बढ़ती जनसंख्या से होने वाली
परेशानियों के बारे में बताया गया है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर,कांकेर,(छ.ग)
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