Saturday, July 11, 2020

रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना- मानव - कल और आज

रचनाकार-एच-एस-अरमो, अरमान ।
निवास-रायपुर, छत्तीसगढ़ ।
जिला--रायपुर छत्तीसगढ़ ।
शीर्षक-"मानव कल और आज "
विधा-कविता (छ्न्द-मुक्त )
       (मानव उत्थान की गाथा)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

***°°मानव कल और आज °°***
       °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
आओ जाने-मानव उत्थान की गाथा,
दो लाख साल पहले, अफ्रीका में,
होमोसेपियंस यानी हमारे पूर्वज जन्मा।

पाषाण युग में,चकमक पत्थर से आग जलाना,
पत्थरों से,जंगली जानवरों का शिकार करना ।

हमारी सभ्यताओं की,हुयी पहचान,
मेसोपोटामिया,मोहनजोदड़ो-हड़प्पा है निशान ।

5500साल पहले,इन्सान ने पहिया बनाया,
अपनी आबादी को,पूरी दुनिया में फैलाया ।

गुफ़ा-कंदराओं में,वह रहता आया,
आज महल-अटारी को,अपना रहवास बनाया ।

कबीले,परिवार,जाति-समाज,रीति-रिवाजों को बनाया,
मानव को,सभ्य-समाज का जीवन दिलाया ।

गांव-कस्बों,गढ़-किलों,रियासतों को बनाया,
आवश्यकता के खातिर,उद्योग-शहरों को बसाया ।

बैलगाड़ी,मोटर-यान,हवाईजहाज,जल-जहाजों को बनाया,
जल-थल-नभ में भी,परिवहन को चलाया ।

विश्व-सभ्यता,बोली-भाषा,सँस्कृति की पहचान कराया,
जगत में,मानवों को,जरुरत ने ही मिलाया ।

वैदिक संस्कृति,विविध धर्म-ग्रंथों की रचना करवाया,
धर्म-युद्घ,सत्ता-युद्घ,शासन-तन्त्र का संविधान बनवाया ।

शिल्पकला,वैदिक-शिक्षा,गुरुकुल    
शिक्षा  दिलाया,

आज वैज्ञानिक खोज-सोच ने, विद्यालय-महाविद्यालय,शोध-संस्थान बनाया ।

सुई से लेकर जहाज ,थल से लेकर नभ का ज्ञान कराया,
टेलिफोन,दूरदर्शन,इंटरनेट जैसे खोजों को लाया ।

आकाल-भुखमरी,महामारी से निपटने की जुगत बनाया ,
तालाबों-बांधों,उन्नत-फसलों,वैकल्पिक भोजन दिलवाया ।

मृत्युदर घटी,औसत जीवन-आयु बढ़ाया,
एंटीबायोटिक ईज़ाद कर,मानव जीवन बचाया ।

बढ़ती आबादी पर,रोक है लगाया,
गर्भ-निरोधक दवा,विधि को है अपनाया ।

शिशु-मृत्युदर को,जगत में है घटाया,
अभय जीवनदान हेतु,टीकाकरण है करवाया ।

मातृत्व-रक्षा में,विश्व-स्वास्थ्य संगठन बनाया,
कुपोषण भगाने,मुफ्त न्यूट्रीशन बँटवाया ।

महिला-साक्षरता को,विश्व मिशन बनाया,
जागरुक-महिला व उन्हें समानता का अधिकार दिलाया ।

मानव-सुरक्षा हेतु,परिवारों को आर्थिक सहायता पहुँचाया ,
आकस्मिक-दुर्घटना का मुआवजा हेतु,बीमा कंपनी बनवाया ।

मानवता जिन्दा रखने,मानव अधिकार आयोग बनाया,
महिला उत्पीड़न रुके ,सशक्तिकरण कानून लाया ।

मानव उत्थान-पतन की,संघर्षों को याद कराया,
देश की रक्षा खातिर,विनाशकारी हथियार बनाया ।

आओ मानवता बचाने,हम मानवीय बन जायें,
प्रत्येक मानव में,ऐसा विचार-संदेश पहुचायें ।
÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷इति÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷
व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि विश्व मानव जाति के कल और आज तक के कुछ आयामों को प्रस्तुत करने की कोशिश की है ।
========मौलिक-प्रस्तुति:--
*अरमो,रायपुर,छत्तीसगढ़ ।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...