जिला:- महासमुंद
विधा :- छंद मुक्त कविता
शीर्षक :- सावन आया है
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रिमझिम बरसे मोती सी बूंदे,
दृश्य लुभावन आया है।
पंख फैलाए निर्जन विजन में,
मयूर ने मोहक नाच दिखाया है।
काली घनघोर घटाएं लेकर,
रिमझिम सावन आया है।
ताल - तलैया भरे लबालब,
नद नाले में उठा तुफान।
खेतों में फसलें लहराती,
पुलकित किसान हर्षाया है।
आशाओं की बूंदें लेकर,
रिमझिम सावन आया है।
अद्भुत फुहार के साथ - साथ में,
त्यौहार हरियाली लाया।
भाई - बहन की नेह से भरा,
रक्षाबंधन भी लाया है।
नव पर्वों की ले सौगात फिर,
रिमझिम सावन आया है।
अबकी सावन देख कर झूले,
फिर- फिर आंखें भर आया।
गए परदेस पिया जो मेरे,
लौट अबतलक ना आया है।
पिया मिलन का लिए संदेशा,
रिमझिम सावन आया है।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने सावन के आने और उसके साथ प्रकृति में हुए बदलाव को प्रर्दशित करने का प्रयास किया है साथ ही विरह वेदना में तड़पती प्रेयसी के मनुभाव को प्रकट करने का प्रयास किया है।
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